Tuesday, January 25, 2022

" वो आहुति मेरी हो। "

                        



चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो..


हो कुंठाओं से ग्रसित समय
या कोलाहल में लिपटा लय
मृत्यु  हो  भय  या  मधुमय
हो  बैरी   या   हितैषी    हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो।


मोह निंद्रा  में सोने वाले
अरि स्वपन संजोने वाले
नित्य हलाहल बोने वाले
या छाया तम की घेरी हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो।


कर, मुंड भी कुछ न शेष रहे
बचा   केवल  अवशेष    रहे
अवशेष   काल का भेष धरे
जलाती  स्वतंत्र  चिंगारी हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो।


जब सूरज  संग हो अंधियारा
न दिखे गगन में कोई सितारा
उस तम में करे जो उजियारा
वो प्राण, दिये की ज्योती हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो।


सजे    धरा    नवरंग    पहन
परिधान बसंती, धानी अंचल
हो  मस्तक  हिमराज  अटल
कण कण कलरव हो फेरी हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो।


श्वेत  पताका  फहरी  हो
या  पताका  केसरी   हो
चढ़नी कोई बलिवेदी हो
या रण की बजती रणभेरी हो
चाहे विडंबना जैसी हो
पर माँ चरणों में तेरी
वो आहुति मेरी हो। 

 — ©️अनामिका 




गणतंत्र दिवस की अशेष शुभकामनाएँ 🇮🇳🖖💐🙏
#गणतंत्र_दिवस #73rd_republic_day 
#India #Tiranga

No comments:

Post a Comment

" वो आहुति मेरी हो। "

                         चाहे विडंबना जैसी हो पर माँ चरणों में तेरी वो आहुति मेरी हो.. हो कुंठाओं से ग्रसित समय या कोलाहल में लिपटा लय मृत्य...