तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
मेरे टूटे - फूटे शब्दों के,
घेरे में तुम बंध जाती हो।
मेरे होठों की तोतली बोली,
संग - संग मेरे दुहराती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
मैं हंसती, तुम मुस्काती हो,
मैं रोती, तुम रो जाती हो।
मेरे भीगे गालों को,
हाथों से पोंछ सुखाती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
रात-रात भर जागूँ अगर मैं,
संग तुम भी जग जाती हो।
मुझपे लूटाने को माँ इतना,
प्यार कहां से लाती हो?
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
मेरे संग अपना बचपन,
तुम बार - बार दुहराती हो।
मुझको तब तुम भा जाती,
जब बेफ़िक्री से हंस जाती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
तुम्हारे चेहरे की स्मित रेखा,
माँ! मुझको खूब लुभाती है।
जो देख सकूँ मैं बार - बार,
मुझे गंगा - स्नान कराती है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
जीवन के अनुबंधों ने माँ,
संबंधों को यूँ बांटा है।
जुड़े हुए अनुबंधों में माँ,
तेरा हिस्सा काटा है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
माँ ! मेरे मन का एक कवि,
तुम्हें लिखने को अकुलाता है।
पर भावनाओं के ऊहापोह में,
शब्द मौन हो जाता है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे एक कविता का वादा रहा!
पर किसी दिन लिखूँगी माँ,
कविता एक नाम तुम्हारे।
होंगे बिखरे छंद, शब्द पर,
वो अमर रहेगी नाम तुम्हारे।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!
– ©'अनामिका'
#माँ_कहो_क्या_मिलोगी_मुझको_तुमसे_एक_कविता_का_वादा_रहा!
❤️❤️❤️
ReplyDeleteबहुत हीं प्यारा ।
सहृदय अनेक आभार आपका 🙏
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