Saturday, October 16, 2021

माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको?

                          

माँ ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


मेरे   टूटे - फूटे  शब्दों   के,
घेरे में   तुम बंध  जाती हो।
मेरे होठों की तोतली बोली,
संग - संग  मेरे दुहराती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


मैं हंसती, तुम  मुस्काती हो,
मैं  रोती, तुम  रो जाती हो।
मेरे    भीगे    गालों     को,
हाथों से पोंछ सुखाती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


रात-रात भर जागूँ अगर मैं,
संग तुम भी जग जाती हो।
मुझपे लूटाने को माँ इतना,
प्यार  कहां  से  लाती  हो?
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


मेरे     संग     अपना    बचपन,
तुम   बार - बार  दुहराती   हो।
मुझको  तब  तुम   भा   जाती,
जब बेफ़िक्री से हंस जाती हो।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


तुम्हारे  चेहरे की स्मित रेखा,
माँ! मुझको खूब लुभाती है।
जो  देख  सकूँ मैं बार - बार,
मुझे गंगा - स्नान कराती है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


जीवन के अनुबंधों ने माँ,
संबंधों  को  यूँ  बांटा  है।
जुड़े हुए अनुबंधों में माँ,
तेरा  हिस्सा  काटा   है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!


माँ ! मेरे  मन  का  एक  कवि,
तुम्हें लिखने को अकुलाता है।
पर भावनाओं के ऊहापोह में,
शब्द   मौन   हो  जाता    है।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे एक कविता का वादा रहा!


पर  किसी दिन  लिखूँगी माँ,
कविता  एक  नाम   तुम्हारे।
होंगे  बिखरे  छंद, शब्द  पर,
वो अमर रहेगी नाम तुम्हारे।
माँ! कहो क्या मिलोगी मुझको ?
तुमसे,एक कविता का वादा रहा!

– ©'अनामिका'




 #माँ_कहो_क्या_मिलोगी_मुझको_तुमसे_एक_कविता_का_वादा_रहा!

2 comments:

  1. ❤️❤️❤️
    बहुत हीं प्यारा ।

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