Saturday, September 4, 2021

चार दिन की ज़िंदगी मिली, हँस लूँ या रो लूँ!

 


रोटी        बना           लूँ

बच्चों    को   खिला    लूँ

रिब्बन    से     बालों    में

चोटी          बना         लूँ

गुथ   लूँ    यूँ    फूलों   को

या     गजरे     लगा      लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस     लूँ     या     रो    लूँ!


धुल   की   परतें   हटाकर

किताबों       में       झाकूँ

या     बांहे         फैलाकर

झुमूं         और        नाचूँ

चंद   लम्हों   की  खुशियाँ

मैं    बाटूँ    या    रख   लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस    लूँ      या    रो    लूँ!


लोगों   की   मैं   सुन   लूँ

या   मन   की  मैं  कर  लूँ

या    तस्वीर     खुद    की

कई    रंगों   से   भर    लूँ

शब्दों      से     मैं     खेलूँ

या  कहानी  कोई  बुन  लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस     लूँ    या     रो    लूँ!


चंद    सपने   आँखों    में

रख      लूँ     सजा      लूँ

उम्र    गुज़री   गुलामी   में

वक़्त    थोड़ा   बिता    लूँ

माँ  के  आँचल  में  लिपटूँ

या  माँ   को  गोद  सुलाऊँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस    लूँ    या     रो     लूँ!


थोड़े   लम्हे   ये  वक़्त   के

वक़्त    से    मैं   चूरा    लूँ

या    गमगीन    लम्हों    में

कुछ     रंगीन    बना     लूँ

या   इन    चार   पलों   को

यादों         में        संभालूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस     लूँ     या     रो    लूँ!


इन   झरोखों   पर   अपनी

आँखें     मैं     टिका     लूँ

भागते     वक़्त     से    मैं

ख़ुद      को     छिपा    लूँ

या   सपनों     को     ज़रा

पलकों     पे    बिठा     लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस    लूँ     या    रो      लूँ!


कुछ  मन  की  मैं  कर  लूँ

थोड़ा  हंस  लूँ  या  रो   लूँ

बीती   गम   में   जो   रातें

या   उन   रातों   को  भूलूँ?

या   पलभर   की   ज़िंदगी

मिली  उसको  मैं  जी   लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस     लूँ     या     रो    लूँ!


या    सहने    की    सबकी

कुछ   सांसें   मैं   भर    लूँ

फिर    चलने   अंगारों  पर

मैं   साहस   भी   रख    लूँ

वक़्त    की     आँच     पर

तपने     को     सज      लूँ

चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस    लूँ     या     रो     लूँ!


चार दिन की ज़िंदगी मिली,

हँस     लूँ     या    रो     लूँ! 


 – © 'अनामिका'


#चार_दिन_की_जिंदगी_मिली_हँस_लूँ_या_रो_लूँ 🌸


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