Thursday, August 12, 2021

वस्तु नहीं मैं नारी हूँ !

वस्तु   नहीं   मैं   नारी   हूँ

गुमनाम नहीं अधिकारी हूँ

तुम पेट पालनेवाले खुद के

मैं   जगत   पालने वाली हूँ

मैं  जगत  पालने   वाली हूँ।


भू  जीवन  का  सार  हूँ   मैं

इस  सृष्टि  का  विस्तार हूँ मैं

आदि से लेकर अवसान तक

प्रचंड   सूर्य   की  लाली   हूँ

वस्तु   नहीं   मैं    नारी    हूँ।


नाकाम  नहीं   न   हारी   हूँ

तुम   एक-एक  पर  भारी हूँ

अंधियारे  में  ज्योति बनकर

जलती  पावक   चिंगारी  हूँ

वस्तु   नहीं   मैं    नारी    हूँ।


अग्नि  में  खिलती  सीता हूँ

श्री हरि  की  पावन गीता हूँ

चौपड़  में   हारी   कृष्णा मैं

मैं  ही  पद्मिनी  क्षत्राणि   हूँ

वस्तु   नहीं   मैं   नारी    हूँ।


मैं ही कृष्ण दीवानी राधा हूँ

मैं    ही   भारत  माता    हूँ

मैं प्रेम की भाषा सिखलाती

मैं   ही   माँ   मैं   धात्री   हूँ

वस्तु   नहीं    मैं   नारी   हूँ।


मर्यादा   का   ज्ञान   हूँ    मैं

न बंध  सकूँ  वो  आग  हूँ मैं

बेड़ी  में  बंधी  परवाज़  नहीं

मैं  उड़ने  की   अधिकारी हूँ

वस्तु   नहीं    मैं   नारी    हूँ।


जीवन  अमृत  की धार हूँ मैं

नभ-मेघों  का  बौछार  हूँ मैं

भरूँ   प्राण  मैं रक्त-दुग्ध से

और  मैं  ही मात कृपाली हूँ

वस्तु   नहीं   मैं    नारी   हूँ।


माया  का  गहरा  जाल हूँ मैं

अधर्मीयों   का   काल  हूँ  मैं

श्री हरि  कण्ठ की   माला मैं

श्री हरि की कुमकुम रोली हूँ

वस्तु   नहीं   मैं    नारी    हूँ।

 –© अनामिका 


#वस्तु_नहीं_मैं_नारी_हूँ #नारी 

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